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30 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में दिखाई दिया. मासिक एक्सपायरी (June Expiry) के दिन निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जबकि आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली ने बाजार पर सबसे अधिक दबाव बनाया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स लगभग 250 अंक गिरकर 76,478.67 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 करीब 80 अंक टूटकर 23,865.75 के स्तर पर बंद हुआ। बाज़ार का हाल: जून एक्सपायरी पर निफ्टी 23,900 के नीचे; IT शेयरों में गिरावट से सेंसेक्स 250 अंक टूटा Share Market Today
बाजार में गिरावट की मुख्य वजह
आज की गिरावट का सबसे बड़ा कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली रही। टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी देखने को मिली. इसके अलावा जून महीने की डेरिवेटिव एक्सपायरी के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया.
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किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा?
आज का सबसे कमजोर सेक्टर आईटी रहा. निफ्टी आईटी इंडेक्स में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा एफएमसीजी और पीएसयू बैंक शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली.
हालांकि दूसरी ओर रियल्टी, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई.
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कौन से शेयर रहे चर्चा में?
आईटी कंपनियों में बिकवाली के कारण टीसीएस, विप्रो और एचसीएल टेक निवेशकों की नजर में रहे. वहीं दूसरी ओर ऑटो सेक्टर में कुछ कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे इस सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा दिया.
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निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक दिन की गिरावट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। यदि आपका निवेश लंबी अवधि का है, तो मजबूत कंपनियों में निवेश जारी रखा जा सकता है। बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव सामान्य हैं और मासिक एक्सपायरी के दौरान अस्थिरता अक्सर बढ़ जाती है.
यदि आप नए निवेशक हैं, तो किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने निवेश लक्ष्य का मूल्यांकन जरूर करें.
आगे बाजार की दिशा कैसी रह सकती है?
अब निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और आगामी कॉर्पोरेट तिमाही नतीजों पर रहेगी। यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं, तो भारतीय बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है. वहीं आईटी सेक्टर की चाल आने वाले सत्रों में निफ्टी और सेंसेक्स की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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निष्कर्ष
30 जून 2026 का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। आईटी शेयरों में बिकवाली और जून एक्सपायरी के दबाव के कारण सेंसेक्स लगभग 250 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हुआ. हालांकि व्यापक बाजार में कुछ सेक्टरों ने मजबूती दिखाई, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर और लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए.
देशी निवेशकों (FII) और घरेलू निवेशकों (DII) की भूमिका
भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.
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आने वाले दिनों में इनके निवेश का रुख बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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