Saving vs Investing: पैसा बचाना जरूरी है या उसे बढ़ाना?

हममें से ज्यादातर लोगों को बचपन से एक बात सिखाई जाती है पैसे बचाओ
लेकिन जैसे-जैसे कमाई शुरू होती है, एक दूसरा सवाल सामने आता है सिर्फ पैसे बचाते रहें या उन्हें निवेश भी करें?

यहीं से Saving और Investing के बीच का फर्क समझना जरूरी हो जाता है.

मान लीजिए आपकी सैलरी हर महीने आती है और उसमें से कुछ पैसा आप अलग रख देते हैं. महीने के आखिर में जो बचता है, उसे बैंक अकाउंट में पड़ा रहने देते हैं. यह Saving यानी बचत है.

दूसरी तरफ, अगर आप अपने पैसों को ऐसी जगह लगाते हैं जहां समय के साथ उनके बढ़ने की संभावना हो जैसे म्यूचुअल फंड, शेयर, बॉन्ड या दूसरी निवेश योजनाएं तो इसे Investing यानी निवेश कहा जाता है.

दोनों का उद्देश्य पैसा ही है, लेकिन दोनों की जरूरत और भूमिका अलग-अलग है.

Saving आखिर क्यों जरूरी है?

जिंदगी हमेशा हमारे बनाए हुए बजट के हिसाब से नहीं चलती.

कभी अचानक मेडिकल खर्च आ जाता है, कभी नौकरी में बदलाव हो जाता है, घर में कोई जरूरी सामान खरीदना पड़ता है या अचानक कहीं जाना पड़ जाता है. ऐसे समय में अगर आपके पास कुछ पैसा अलग रखा हुआ है, तो छोटी-सी परेशानी बड़ी समस्या नहीं बनती.

इसीलिए बचत को मैं पैसे बढ़ाने से ज्यादा पैसे संभालने की आदत मानता हूं.

एक अच्छी शुरुआत यह हो सकती है कि हर महीने की कमाई में से पहले कुछ हिस्सा बचत के लिए अलग रखा जाए. बाकी पैसे से खर्च किया जाए। क्योंकि अगर हम सोचें कि महीने के अंत में जो बचेगा, वही बचाएंगे, तो कई बार बचाने के लिए कुछ बचता ही नहीं.

फिर Investing की जरूरत क्यों पड़ती है?

अब यहां एक छोटी-सी दिक्कत है.

समय के साथ चीजों की कीमत बढ़ती रहती है. आज जो सामान 1,000 रुपये में मिल रहा है, जरूरी नहीं कि कुछ साल बाद भी उसकी कीमत उतनी ही रहे। इसे महंगाई यानी Inflation कहते हैं.

अगर आपका पैसा सिर्फ बचत खाते में पड़ा है और उसकी बढ़त महंगाई से कम है, तो कागज पर आपकी रकम बढ़ रही होगी, लेकिन उसकी असली खरीदने की क्षमता उतनी तेजी से नहीं बढ़ेगी.

यही वह जगह है जहां निवेश की भूमिका आती है.

निवेश में पैसा ऐसी जगह लगाया जाता है जहां उससे लंबे समय में रिटर्न कमाने की संभावना होती है. लेकिन यहां एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए, निवेश में रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी होता है.

इसलिए निवेश को बचत का दूसरा नाम समझना सही नहीं होगा.

Saving और Investing में सबसे बड़ा फर्क

सीधी भाषा में समझें तो

Saving का काम है आपके पैसे को जरूरत के समय उपलब्ध रखना

Investing का काम है आपके पैसे को लंबे समय में बढ़ने का मौका देना

उदाहरण के लिए, अगर आपको अगले छह महीने में लैपटॉप खरीदना है, तो उस पैसे को किसी ऐसे निवेश में लगाना समझदारी नहीं होगी जिसमें बाजार गिरने पर आपकी रकम कम हो सकती है.

वहीं अगर आपका लक्ष्य 10 या 15 साल बाद का है, तो लंबी अवधि के निवेश के बारे में सोचा जा सकता है.

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कहां रखें?
सवाल यह भी है कि इस पैसे की जरूरत मुझे कब पड़ेगी?

कितनी Saving और कितना Investing?

इसका कोई एक फॉर्मूला हर व्यक्ति पर लागू नहीं हो सकता।

किसी की कमाई ज्यादा है, किसी की जिम्मेदारियां ज्यादा हैं. किसी पर लोन है तो किसी के घर में बच्चों की पढ़ाई का खर्च है..इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति का प्रतिशत देखकर अपनी पूरी financial planning करना ठीक नहीं है.

लेकिन शुरुआत के लिए एक सरल तरीका अपनाया जा सकता है.

पहले अपने जरूरी खर्चों और कुछ महीनों के emergency fund पर ध्यान दें. उसके बाद जो पैसा लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना है, उसके लिए निवेश के विकल्प देखे जा सकते हैं.

यहां एक और गलती लोग अक्सर करते हैं. निवेश शुरू करने के चक्कर में अपनी सारी बचत लगा देना.

ऐसा करने की जरूरत नहीं है.

आपके पास ऐसा पैसा होना चाहिए जिसे जरूरत पड़ने पर बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सके. बाकी लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेश धीरे-धीरे बनाया जा सकता है.

क्या Saving और Investing में से एक ही चुनना चाहिए?

मेरे हिसाब से नहीं.

असल जिंदगी में Saving और Investing एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं दोनों साथ चलते हैं.

बचत आपको आर्थिक झटकों से बचाने में मदद करती है, जबकि निवेश आपके लंबे समय के लक्ष्यों के लिए पैसा बढ़ाने का रास्ता दे सकता है.

इसे ऐसे समझ सकते हैं
Saving आपकी financial safety belt है और Investing आपकी long-term growth की कोशिश

सिर्फ बचत करने से पैसा सुरक्षित रह सकता है, लेकिन उसकी growth सीमित हो सकती है. वहीं बिना बचत के निवेश करने पर अचानक जरूरत आने पर आपको अपना निवेश गलत समय पर निकालना पड़ सकता है.

इसलिए पहले आर्थिक आधार मजबूत करना और फिर अपनी क्षमता, लक्ष्य और जोखिम को समझकर निवेश करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।

आखिर शुरुआत कहां से करें?

अगर आपने अभी तक Saving और Investing के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा है, तो एक साथ बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है।

सबसे पहले अपनी महीने की कमाई और खर्च लिखिए। आपको खुद पता चल जाएगा कि पैसा आखिर जा कहां रहा है।

फिर एक छोटी emergency saving बनाना शुरू कीजिए।

उसके बाद अपने उन लक्ष्यों की सूची बनाइए जो कुछ साल बाद पूरे करने हैं. जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, retirement या कोई बड़ा personal goal

फिर हर लक्ष्य के लिए समय और जोखिम को देखकर निवेश के विकल्प समझिए.

और सबसे जरूरी बात जिस निवेश को आप समझते नहीं हैं, उसमें सिर्फ किसी के कहने पर पैसा मत लगाइए.

पैसा कमाने में जितनी मेहनत लगती है, उसे सही जगह रखने में थोड़ी समझदारी भी उतनी ही जरूरी है.

निष्कर्ष

Saving और Investing में असली मुकाबला नहीं है.

एक तरफ बचत है, जो हमें मुश्किल समय के लिए तैयार रखती है. दूसरी तरफ निवेश है, जो हमारे लंबे समय के पैसों को बढ़ाने की कोशिश करता है.

इसलिए शायद सही सवाल यह नहीं है कि “Saving बेहतर है या Investing?”

सही सवाल है “मेरे पास जो पैसा है, उसमें से कितना मुझे सुरक्षित रखना चाहिए और कितना लंबे समय के लिए बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए?”

जब यह फर्क समझ में आने लगता है, तब personal finance थोड़ा कम उलझा हुआ और थोड़ा ज्यादा आसान लगने लगता है.

Disclaimer : यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है. इसमें दी गई जानकारी को किसी भी तरह की वित्तीय या निवेश सलाह न माना जाए. हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता अलग होती है. किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले स्वयं जानकारी जांचें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें. निवेश में बाजार जोखिम शामिल होता है और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती.

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