
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता कुछ खास अच्छा नहीं रहा. Nifty 50 ने लगातार चौथे हफ्ते गिरावट दर्ज की है – जो पिछले 5 महीनों में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है. आइए समझते हैं आखिर बाजार में यह सुस्ती क्यों बनी हुई है.
हफ्ते भर का हाल कैसा रहा?
पूरे हफ्ते में Nifty करीब 1.15% गिरा, और Sensex भी 1% नीचे आया। हफ्ते के 5 में से 4 दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ. हालांकि शुक्रवार को थोड़ी राहत मिली – Nifty ने अपनी 4-दिन की लगातार गिरावट को तोड़ते हुए मामूली बढ़त के साथ बंद किया, और एक समय तो 24,000 के अहम स्तर को भी छू लिया था. लेकिन ऊपरी स्तरों पर फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे इंडेक्स अपने दिन के लो के करीब बंद हुआ.
गिरावट की 3 बड़ी वजहें
1. Crude Oil की बढ़ती कीमतें
इस हफ्ते Brent Crude करीब 7% उछल गया, जिसकी वजह US-Iran के बीच बढ़ता तनाव है. भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, महंगा क्रूड ऑयल सीधे महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ाने का काम करता है – यही वजह है कि निवेशक सतर्क हो गए हैं.
2. Global Geopolitical तनाव
जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Middle East conflict) ने ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स को भी ऊपर धकेला है, जिससे दुनियाभर में Risk Assets (जैसे शेयर बाजार) से पैसा निकलने का रुख देखा गया.
3. अच्छे आर्थिक आंकड़ों का भी असर नहीं
सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत के मजबूत Domestic Growth Data और GST Collections के अच्छे आंकड़े भी इस हफ्ते बाजार को सहारा नहीं दे पाए. इससे पता चलता है कि फिलहाल Global Factors, घरेलू अच्छी खबरों पर हावी हैं.
क्या आगे राहत मिलेगी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्ते में एक व्यस्त IPO Pipeline भी माहौल को प्रभावित कर सकती . जब बड़ी मात्रा में पैसा नए IPOs में लगता है, तो कई बार Secondary Market (मौजूदा लिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री) में गतिविधि थोड़ी धीमी पड़ जाती है.
Technical View से देखें तो, RSI (Relative Strength Index) फिलहाल 40 के आसपास है, जो कमजोर Momentum दिखाता है. निकट भविष्य में Support Level 23,758-23,672 के आसपास और Resistance 24,037-24,124 के बीच माना जा रहा है.
निवेशकों के लिए क्या सीख है?
इस तरह की गिरावट के दौर में घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेना अक्सर नुकसानदेह होता है। शेयर बाजार का इतिहास बताता है कि ऐसी गिरावटें अस्थायी होती हैं, और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समझना ज्यादा जरूरी है कि किसी एक हफ्ते या महीने की गिरावट पूरी तस्वीर नहीं बताती। SIP के जरिए निवेश करने वालों के लिए, ऐसे समय अक्सर औसत लागत (Average Cost) घटाने का मौका भी बन जाते हैं.
Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है, यह निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं है. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. कोई भी निर्णय लेने से पहले SEBI Registered Financial Advisor से सलाह जरूर लें.
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